सुबह

4 Comments

कुछ कमी है इस ज़िन्दगी में,
मैंने यह जाना है हालही में ,
कुछ इस दिल की नादानी थी ,
कुछ इलज़ाम किस्मत पर भी डाला मैंने.

जब होश आया जाना मैंने ,
क्या खोया क्या पाया है ,
जो भी दिया ज़िन्दगी ने ,
अपनाया है कुशी से मैंने.

अब क्या शिकायत करूं ,
क्या शिकवा है किसी से ,
कोई दिल से निखल चला है ,
किसी को दिल में बिठाया है मैंने.

एक दिल की धड़कन पे चा चूका था ,
एक चाह छु गयी थी इस दिल को ,
जो लम्हे यादों में बिताते थे हम ,
उन पलों को आंसुओ में बहाया है मैंने.

न याद करना है मुझे आज ,
जो हुआ या जो होने वाला है ,
हर एक दिन एक नयी शुरुवात है मेरी ,
सहमी हुई रातोंको सुबह कर लिया है मैंने .

Advertisements

4 thoughts on “सुबह

  1. Thank you Kavita. I am glad I am back too. 🙂 Happy friendship day to you too. :)Shukriya A S. :)Shukriya chechi. 😀 Soonepan se yaad aaya mujhe,Kuch udaasi ki bhi baat thi,Donon ko mila kar rakha hai,Apni saraankhon pe maine….. 😀

    Like

Please do leave a Reply :)

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s